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आत्मज्ञान बिना नर भटकत

इस संसार में मानव जन्म मिलना एक सौभाग्य है इस जन्म की सार्यकता तभी है जब स्वयं के बारे में बिचार किया जाये की हम कौन हैं ? यानी आत्मज्ञान ही ज्ञान की पराकाष्ठा है हम किसी दूसरे के बारे में चाहे कितना भी जान लें पर उसका कोई मूल्य नहीं है |
इस जीवन की सबसे बड़ी समस्या है अपने प्रति ज्ञान का अभाव जब हम स्वयं के बारे में नहीं जानते तो हमारी जीवन नैया उसी प्रकार चलती है जैसे नाविक ही नशे में चूर हों इसमें आश्चर्य की बात नहीं है की नाव भूलते भटकते कहीं से कहीं जा लगे |
जब हमने कुछ इस प्रकार के लेख पढ़े तो आत्मचिंतन की और जीवन बढ़ने लगा कुछ समझ में आया कि पिछले जन्मों के पुण्य हैं जो यह मानव जन्म मिला है कषाय कल्माष ऊपि शत्रुओं ने आत्म तत्व के ऊपर जो पर्दा दाल रखा था वह धीरे धीरे हट गया
देवीय कृपा से स्वार्थ से परमार्थ की तरफ भाव बनने लगा चिंतन से स्पष्ट हुआ की इस जीवन का कोई ठिकाना नहीं है की कब क्या हो जाये किसी कवि की दो पक्तियां याद आती हैं
"क्या लाये थे क्या ले जाना खाली आना जाना
यहीं रहा सब यहीं रहेगा फिर क्यों मोह लगाना "

इसी उद्देश्य से श्रीराम सेवा आश्रम समिति का संचालन हो रहा है


संस्था द्धारा संचालित कार्यक्रम

1 - कन्या भ्रूड़ हत्या जागरूकता
2 - व्यसन मुक्ति जागरूकता
3 - दहेज़ उन्मूलन कार्यक्रम
4 - वृक्षारोपड़
5 - यज्ञ प्रबचन एवं कर्मकांड
6 - जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता
7 - आश्रम का निर्माण एवं प्रचार प्रसार

संस्था के प्रस्तावित कार्यक्रम

1 - गौशाला निर्माण
2 - निर्धन निरासित बृद्धों की सेवा
3 - सिलाई कड़ाई सेंटर
4 - पुस्तकालय
5 - बाल संस्कार साला
इत्यादि